Jeevan Vidhya Audios

अपनी अक्षमता का प्रदर्शन ही क्रोध/गुस्सा है |

गलतियां व समस्याएं भ्रमित इंसान के जीवन का हिस्सा होती है |

बाहर की दुनिया में मैंने वह सब पा लिया जो मैंने कभी सोचा ही नहीं था पर उस से मेरी अंदर की दुनिया (भाव व विचार) अच्छे नहीं हो पाए |

कोई घटना जिसे में handle नहीं कर पाता था, जिससे मैं अंदर तक हिल जाता था उसे मैं बिना effect हुए हैंडल कर लेता हूं यही maturity है |

मेरा बच्चा मेरे व मेरे परिवार के व्यवहार व आचरण का आईना है |

हमारी वर्तमान शिक्षा में आप किसी भी लेवल पर चले जाएं वह यह गारंटी नहीं दे पा रही है बच्चा बड़ा होकर लोगों का पोषण करेगा या शोषण |

Does my family fulfil and determine its own materialistic needs without being influenced by other family members (neighbours, relatives, friends)?

When I am unable to make my feelings and thoughts pleasant within then I try to find it (pleasant thoughts) in others and I live with over expectations. 

Human means I can live worse than an animal and I can also live better than the God.

भाव व विचारों की गरीबी के कारण इंसान यानी मैं सामने वाले को (रूप, बल, धन, पद) से judge करता है साथ ही हम भी इन्हीं चार चीजों पर काम करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि दुनिया हमें केवल इसी से judge करेगी | (इन सब का कारण हमारी मानसिक गरीबी / भाव व विचार की गरीबी है|)

अधूरेपन के अधूरेपन को समझ जाना ही समीक्षा है |

जिसके पास क्यों जीना है व कैसे जीना है का जवाब है वहीं शिक्षक व मां-बाप है, जिसके पास उसके जवाब जानने की उत्सुकता है, जिज्ञासुता है वही सही मायने में विद्यार्थी हैं |

Anger is the reflection of your incompetence/inability.

Mistakes and Problems are the endless part of an ignorant human.

In the outside world, I have achieved what I could never imagine but it could not make my inner world (world of feelings and thoughts) happy/blissful.

Any event which used to shake me up can be handled by me by being at inner peace now, it is maturity.

In our current educational system, whether you go on any level, it is unable to take the guarantee of child that when this child will be grown up, he/she will nurture others or exploit others.

My child is the reflection of my family’s and my own behaviour and conduct.

क्या मेरा परिवार दूसरे परिवारों (पड़ोसी, रिश्तेदार, दोस्तों) से प्रभावित हुए बिना खुद की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति व निर्धारण करता है ?

जब मैं खुद के भाव व विचार को सही नहीं कर पाता तो मैं उसे लोगों से पाने की कोशिश करता हूं और मैं अति अपेक्षा में जीता हूं |

मानव यानी मैं जानवर से बदतर भी जी सकता हूँ और भगवान से श्रेष्ठ भी जी सकता हूँ |

शादियों के समारोह एक दूसरे को प्रभावित करने का अड्डा है |

आइए सोचते हैं, लिस्ट बनाते हैं कि किन-किन चीजों से हमारे अहम / अहंकार का पोषण होता है |

मुझे एक ऐसी स्थिति में आना है जहां मैं रूप, बल, धन, पद से हमेशा comparison मोड में ना बना रहूं |

Marriage is a social declaration, in which two people declare that they are now ready to give the right life to the next generation.

The listened helps in making someone listen, The understood helps in living, The lived helps in explaining.

When there is no contentment in my life, I always remain unable to appreciate anything, anyone. If I am not able to appreciate anything or anyone, it simply means I am a dissatisfied soul. 

Either you are self-inspired or you are driven by the outside world (you become unpaid servant of outside world).

The reason of my sadness is my own incapability, the reason of my sadness is my own emptiness, the reason of my sadness is, I do not love myself.

If I go close to the nature by being fed-up from other humans then I would not be able to feel good for longer time in nature either. I would soon feel fed-up from nature as well.

हमारे मकान अपने हैं और मन किराए पर चल रहे हैं |

शादी एक सामाजिक घोषणा है जिसमे दो लोग/ मानव आने आने वाली पीढ़ी को सही जिंदगी देने को तैयार हो जाते हैं |

सुना हुआ सुनाने के काम आता है | समझा हुआ जीने के काम आता है | जिया हुआ समझाने के काम आता है |

जब मेरी जिंदगी में तृप्ति नहीं होती तो मैं appreciate नहीं कर पाता, appreciate ना करने का अर्थ है आप एक अतृप्त आत्मा है |

जब आप स्वप्रभावित नहीं हो पाते हैं तो आप परप्रभावित होते ही हैं |

मेरे दुख का कारण मेरी अक्षमता है, मेरे दुख का कारण मेरा अधूरापन है, मेरे दुख का कारण है मैं खुद से प्यार नहीं करता हूं |

अगर इंसान (मैं) किसी दूसरे इंसान से तंग होकर nature के पास जाता है तो वह nature को यूज में लेता है खुद को कुछ समय के लिए अच्छा महसूस कराने के लिए |

Let's think and make a list that what are those things which nourish my ego? 

Due to the poverty of pleasant feelings & thoughts within, I judge everyone on the basis of appearance, strength, wealth, position and I myself also work on these things only because I think that world would judge me on this basis only. (The reason of this wrong comparison/ judgement is my own mental poverty / poverty of happy feelings and thoughts.)

These days, marriage ceremonies are a place to impress/influence each other.

I have to be in that state of mind where I am not always in the comparison mode on the basis of appearance, strength, wealth and position.

We have our own houses and our hearts and minds are on rent.

Those who know the answer of “How to live and Why to live” are eligible to be the teachers and the parents, those who have hunger/thirst/curiosity to know the answer of “How to live and Why to live” are eligible to be students.

Understanding the incompleteness of the incomplete is true analysis.

इंसान जो भी करता है खुद की खुशी के लिए करता है किसी को दुःख देने के लिए नहीं करता है |

सदुपयोग ही सुख है, दुरुपयोग ही दुख है| (वो चाहे किसी भी चीज का हो किसी भी इंसान का हो, जो जिस का दुरुपयोग करेगा उसी से वंचित हो जाएगा |)

मानव/ इंसान खुद के होने का प्रयोजन (purpose) जानना चाहता है, जब उसे वह नहीं मिलता तो वह हर कुछ ही करते हुए जीवन बिताता रहता है और उसे ही जीवन मान लेता है क्योंकि ऐसा मानना उसकी मजबूरी हो जाती है |

इंसान चीजों की कमी से दुखी नहीं होता हैं, भाव की कमी से होता है |

झगड़ा/युद्ध कोई वीरता नहीं है, झगड़ना/युद्ध करना एक अंतिम फैसला है |

लगातार कोई ना कोई घटना व व्यक्ति मेरे भाव व विचारों की स्थिति को तय कर रहे हैं और इसलिए ही मैं परतंत्र हो गया हूं |

मुझे सामने वाले इंसान का action दिखता है उसका intention नहीं दिख पाता है, इसलिए मैं उसे गलत समझ लेता हूं |

किसी की गलत क्रिया करने पर उसे मार देना या घायल कर देना (शब्दों से) का मतलब यही है कि मैं एक सामान्य इंसान हूं, दम होने का अर्थ है, किसी के नकारात्मक सोच को माफ कर देना और उसकी नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने में उसका सहयोग कर पाना |

Every human being has the same common goal, when I understand this profoundly, I feel a sense of belongingness automatically, I start to consider all like me and me like all. (If someone is understood, we will understand, and if someone is less understood then we will help him understand.)

Whatever good the world/ society has done, we are getting a lot of good things (physical or materialistic) to live in life, so we will also be compelled to pay the "unwise tax (rape, theft, accident, murders, riots, anger, betray)" on which the world/ society has not worked.

The gap between the acceptance and unacceptance is Compromise.

Having less sadness is not the happiness.

All the hard work of mankind (practice and efforts to understand the life) is only for relaxation. Relaxation - A state of mind where there is no commotion in my feelings and thoughts and they are always blissful to me.

अनुसंधान – जो उपलब्ध नहीं है उसको ढूंढना | अध्ययन - जो ढूंढा जा चुका है उसे समझना और आचरण में लाना |

इंसान गलती से नहीं सीखता है वह सही के reference / प्रकाश में सीखता है, जानने और जीने के बीच में जो गलतियां होती है वह Evolution है. Mistakes नहीं |

दुनिया का सबसे बड़ा काम है इंसान बनना और इंसान बनाना, और इसे शिक्षा के माध्यम से परंपरा में लाया जा सकता है |

मां-बाप व teacher का आचरण व व्यवहार ही बच्चे के लिए अध्ययन की वस्तु है, किताबें सिर्फ सूचना है |

परगुण गणना से स्वयं का विकास होता है, परअवगुण गणना से स्वयं का नाश होता है |

अगर आपको हर जगह सिर्फ negativity ही दिखाई देती है तो इसका मतलब है आप एक अतृप्त आत्मा है, dissatisfied soul है |

जिसकी खुद पर नहीं चलती वह दूसरों पर चला कर खुद के हैं अहंकार का पोषण करता है |

जीवन का पेट्रोल “प्यार” है |

A human does everything for self-happiness, he/she does nothing to hurt someone.

Utilization is happiness, Abuse is suffering, (Whoever it may belong to, be it any human or anything, whoever misuses anyone, anything, he/she will be deprived of it.)

Human wants to know the purpose of his existence. when he does not find it, he spends his complete life doing anything worthless and he starts to consider it only the real life.

We do not get hurt due to lack of things; we do get hurt due to lack of feelings.

War is not a bravery; it is the final decision.

Constantly, any event or human is deciding the state of my mind that is why I have become others puppet.

I am able to see only the action of the front person, not his intention that is why I consider him wrong.

हमारे (सभी मानवो के) common goals एक ही हैं, जब मैं इस बात को समझ जाता हूं मैं अपने आप एक sense of belongingness को feel करने लग जाता हूं मुझे सभी मुझ जैसे ही लगने लगते हैं | (अगर कोई समझा हुआ है तो हम उससे समझ लेंगे और अगर कोई कम समझदार है तो हम उसे समझा देंगे)

समाज/ दुनिया ने जो भी अच्छा किया उसके फलस्वरूप हमें बहुत अच्छी चीजें जिंदगी में जीने को (शारीरिक तौर पर) मिल रही है तो हमें उस “नासमझी टैक्स” को भी चुकाना होगा जिस पर दुनिया व समाज ने काम नहीं किया है और जिससे हमें बड़ी कीमत (रेप, चोरी, accident, मार-काट, गुस्सा, धोखा) चुकानी पड़ सकती है |

स्वीकार व अस्वीकार के बीच की कड़ी को ही समझौता कहते हैं |

कम दुःखी होने का मतलब सुखी होना नहीं है |

मानव जाति का समस्त श्रम (समझने के लिए किया गया अभ्यास व प्रयास) केवल विश्राम के लिए है | विश्राम - एक ऐसी स्थिति जहां पर कोई भाव व विचार में खलबली व उतार-चढ़ाव ना हो |

Research – Finding something which has not been discovered yet. Learning – Understanding and Putting something into practice which has been found.

Killing someone or injuring someone (by words) simply means, I am a normal person, the meaning of having courage or being brave is to forgive one's negative thinking and helping him convert his negativity into positivity.

Human does not learn from the mistakes; he learns with the correct reference or under the light of enlightenment. Loopholes between knowing and living is not mistakes; this is the evolution.

The biggest work of this world is to become a resolved human and create resolved humans; no work is bigger than it. And it can be brought into practice through education only.

Parents’ and teachers’ behaviour is the only thing to learn for a child/ student. Books are just a source of information.

When we keep counting others vices, we get nothing, we simply destroy our lives. When we count others virtues then we develop ourselves within.

घर के ड्राइंग रूम में सिर्फ Cloth, Food, Bungalow, Cars, साड़ियों, गाड़ियों की बात नहीं की जाएं, वो एक जगह है जहां समाधानित होने, शिकायत मुक्त होने, समृद्धि पाने, अभयता पाने व प्रकृति में संतुलित होने के बारे में बात की जाएं |

बच्चे के शरीर के पोषण की जिम्मेदारी मां-बाप ले रहे हैं पर बच्चे के आचरण की जिम्मेदारी मां-बाप नहीं ले रहे हैं उसके लिए हम उन्हें मोटिवेशनल गुरु, स्कूल, कोचिंग, पॉलीटिकल पार्टीज के भरोसे छोड़ रहे हैं |

हमें (मुझे) या तो चुप रहना आता है या लड़ना आता है |

जब भी मानव कुछ सीखेगा तो अपने से श्रेष्ठ आचरण वाले मानव से ही सीखेगा, कहानियों में बताए गए कुत्ते, बिल्ली, मगरमच्छ, बंदर के द्वारा किये गए आचरण से नहीं |

शिष्टता का सही अर्थ अपनी असहमतियों को संकोचपूर्वक बताना, इससे सामने वाला भी hurt नहीं होता व मैं भी hurt नहीं होता |

जब मैं घटना के प्रभाव से अप्रभावित रह पाता हूं तभी मेरे अंदर बात करने की योग्यता बन पाती है |

मेरा status मेरा गाड़ी, बंगला, salary नहीं है, मेरा स्टेटस यह है कि मेरा state of mind कैसा है |

जब आप प्रकृति की सबसे अच्छी इकाई मानव से सही से बात नहीं कर सकते, उसके साथ सही से नहीं रह सकते तो आप nature के साथ भी ज्यादा वक्त नहीं बिता पाएंगे |

If you are able to see only negativity everywhere, it simply means; you are a dissatisfied soul.

One who is not capable to control self, tries to dominate others to nurture his/her ego.

The petrol of life is “love”.

Drawing room in home is not a place just to talk about clothes, food, bungalow, car, sarees; it is a place where the discussion is needed to be, to be resolved & complain-free, to gain prosperity, to live with fearlessness and to have balance in nature.

Parents are taking the responsibility of the nourishment of child’s body but they are unable to take the responsibility of child’s behaviour; for behaviour parents are leaving the children in the hand of motivational gurus, coachings, political parties, schools.

I don’t know to behave; I know either to be quiet or to fight.

Whenever human would learn he would from the better/greater human and his/her behaviour only. The human can never learn from dog, cat, crocodile, monkey as described in our childhood stories.

The true meaning of decency is to express the disagreements with hesitation, it hurts neither you nor another person.

When I am unaffected from the effects of any negative event then only, I am eligible to talk about the event.

One(human) who cannot live with the best creation(human), would not be able to live with the nature either for much time.

भौतिक सुख = “सुविधा”

कभी-कभी शिक्षा (degree) हमें झूठा अहंकार दे देती है, और हम लोगों को इससे नीचा दिखाकर उस अहंकार का पोषण करते रहते हैं |

समझ - जो जैसा है वैसा ही जानना | भ्रम - जो जैसा है उसे उससे अन्यथा मान लेना |

जीवन जीने का universal law एक है, इसलिए मानव जाति सही में एक है गलत में अनेक | जैसे - सभी ख़ुशी की निरंतरता चाहते हैं तो यहाँ सभी एक हैं , पर जो सोचते हैं मेरा धर्म (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, जैन ही सही है) पर यह universally applicable व अस्तित्व-सहज नहीं है क्योंकि यह गलत है (इसलिए मानव जाति सही में एक है गलत में अनेक) |

मुझे यह समझना है कि existentially हर मानव सही ही है कुछ conditions से वह भ्रमित हो गया है और वह भी ऐसा चाहता नहीं है, अगर उसका साथ दिया जाए तो वह सही मानव बन सकता है |

हर इंसान खुद की उपयोगिता, खुद की महत्वता, खुद का utilization जानना चाहता है, वह खुद का सदुपयोग चाहता है, उससे कम में वह तृप्त नहीं हो सकता |

जब मैं समझ कर जीने की स्थिति में आ जाता हूं, मैं happy और तृप्त हो जाता हूँ और मैं इसे बांटना चाहता हूँ और लोगों को भी ऐसे जीने में सहयोग देना चाहता हूँ, इसे ही “सच्चा प्यार” कहते हैं |

मेरे तृप्ति व ख़ुशी का expression ही कार्य/ कार्यक्रम है |

The sutras/lessons of Jeevan-Vidhya can just help you to be at relaxation for some moments but it doesn’t help you living happily all the time until you actually understand them and practice them in living.

The one who is driven by heart(within) is human, The one who can express self by understanding the whole is human.

The disobedience/ autocratic nature of our children shows that they have rejected us as humans.

If you have a vision then you will decide where will you utilize your skills / talent but if you don’t have vision then it will be decided by money.

The most talented children of the country feel the emptiness first, because they are able to meet their materialistic needs very quickly and after that they do not know what to do?

The bridge between possibility and  the need is logic.

We all keep hurting others and getting hurt in the state of being ignorant/confused.

The one who is self-controlled/ self-disciplined cannot be ruled upon, the one who is not self-controlled/ self-disciplined needs dominance.     

विरोध का कोई अर्थ नहीं जब तक आपके पास कोई विकल्प ना हो |

जब आप गलती करते हैं तो आप सुनने के लिए सुपात्र होते हैं | (बच्चे को बचपन में छोटी-छोटी गलतियां करने देना ठीक है ताकि वह बड़ी गलतियों को करने से पहले सोच पायें, चीजों की समीक्षा कर पायें व अस्तित्व -सहज जीवन जी पायें )

हम कुछ खरीद नहीं सकते हैं, हम सिर्फ मानव श्रम व कुशासन का पैसा देते हैं |

प्रकृति मेरी नहीं है, मेरे लिए है |

मुझे प्रकृति को वैसे ही समझना है जैसे मैं कभी मेरे दोस्त या भाई के घर कुछ दिन कृतज्ञता के साथ रहता हूं मैं वहां की चीजों का दुरुपयोग नहीं करता क्योंकि मुझे पता है यह मेरे लिए है मेरी नहीं है |

जब मैं लेने के भाव में होता हूं मैं हमेशा छोटा महसूस करता हूँ (कुछ समय के लिए हो सकता हैं मुझे कुछ समय के लिए अच्छा महसूस हो भी जाए, पर वो हमेशा के लिए अच्छा नहीं होता है) जब मैं देने के भाव में होता हूं मैं हमेशा बड़ा महसूस करता हूँ |

My status is not my car, bungalow, salary; my status is how is my state of mind.

Materialistic happiness = Facilities/ physical comfort

Sometimes, education gives us a false ego and we keep humiliating people with this false ego and keep nurturing our ego.

Understanding – Knowing something as it is. Confusion/illusion - Making an opinion on something without any base/logic.

The universal law of living life is one (same for all), therefore mankind is same/one when they understand the right but they are always different when they understand wrong. For example – All want the continuity of happiness so here we all are same/one but, when we think only my religion (Hindu, Muslim, Christian, Jain) is good but it is not universally right then we are different.

Everyone wants to know his/her utilization, own importance. He/she wants to be fully utilized, not used and nobody can be satisfied in lesser than it.

I have to understand that existentially every human is good only, some conditions/ circumstances have made him/her confused/ignorant and he himself does not want to live like this; if he will be given proper understanding then he can also become a human with understanding.

When I come in the state/condition to live after understanding the whole then I become happy & satisfied and I want to share it; I want to help people in living like this, it is truly the "true love".

The expression of my fulfilment and happiness is work / program.

जीवनविद्या/ जीवन के सूत्रों से आप कुछ वक्त के लिए संभल जाते हैं पर आप उससे आप सुखपूर्वक जी पाएंगे ऐसी कोई स्थिति नहीं बनती हैं क्योंकि जीने के लिए समझना जरूरी है |

जो मन से संचालित है वही मानव है, जो संपूर्ण (जीवनविद्या परिचय व अध्ययन) को समझकर व्यक्त कर सके वही व्यक्ति है |

हमारे बच्चों का मनमानी करना यह बताता है कि उन्होंने हमें अस्वीकार कर लिया है |

अगर आपके पास विजन है तो आपके स्किल्स/ टैलेंट का उपयोग कहाँ होगा यह आप तय करेंगे नहीं तो यह पैसा तय करेगा |

देश के सबसे प्रतिभाशाली बच्चे सबसे पहले खालीपन को महसूस करते हैं, क्योंकि वह अपनी भौतिक जरूरतों को पूरा करने में बहुत जल्दी कामयाब हो जाते हैं और उसके बाद वो क्या करें उन्हें पता नहीं होता |

संभावना व आवश्यकता के बीच का ब्रिज ही तर्क है |

हम सब भ्रमित अवस्था में मानसिक स्तर पर सु-सु, पॉटी करते रहते हैं और खुद को वह दूसरों को गंदा करते रहते हैं (एक-दुसरे को शब्दों से घायल करते रहते हैं) |

जो स्वनियंत्रित है उस पर शासन नहीं किया जा सकता, जो स्वनियंत्रित नहीं हैं उस पर शासन करना एक आवश्यकता है |

There is no mean of protest until you have a better substitute.

When you make a mistake then only you become deserving to listen. (It is okay to let the child make small mistakes in childhood so that he could think, understand and do critical analysis of what is right, what is not and can live an existential-oriented life.)

We cannot buy anything; we only give the money of human-hard work and maladministration.

Nature is not of me, it is for me.

I have to consider the nature in this way only, like I live at my any relative’s home for some days with a great gratefulness by knowing one truth that here all the things are for me but not of me and because of this I don’t misuse anything.

Whenever I have the emotions to take then I always feel petty/inferior, but whenever I have the emotions to give then I always feel fulfilled and dignified.

सही शिक्षा का / शिक्षक का अर्थ है “उपकार”

संतोष है तो प्रतिफल नहीं, प्रतिफल है तो संतोष नहीं मिल सकता |

जब आप मानवता के लिए रूप, बल, धन, पद, यश बिना किसी की चाह के कुछ करते हैं तो आप खुद कुदरत हो जाते हैं |

इंसान खाली हाथ आता है, खाली हाथ जाता है | (यह गलत है) इंसान बच्चे के रूप में सही आचरण को सीखने की अपेक्षा लेकर आता है व जाते वक्त परिवार को, समाज को, दुनिया को सही या गलत आचरण के example देकर जाता है |

भाव- भव (होना) की स्वीकृति ही भाव है| विचार- भाव का प्रस्तुतीकरण ही विचार है|

स्वयं को वातावरण के दबाव से मुक्त कर लेना ही absolute freedom हैं यही सच्ची स्वतंत्रता है |

I have to use the things as per my needs so that I will do less expenses and they will be as per my suitability and need, and by doing this I will be able to become a contributor in leaving enough resources for the upcoming.

My happiness is designed, defined and driven by the quality of my feelings and thoughts. My sadness is the mismanagement of my feelings and thoughts.

Less sadness is not happiness. / The reduction of the sorrow is not happiness.

True education and true teacher mean "favour".

Where there is remuneration there cannot be satisfaction, where there is satisfaction there the remuneration is not needed.

When you do something for humanity having no greed towards gaining better appearance, greater power, more money, bigger post and fame, then you yourself become the nature/ existence.

Human comes empty handed and goes the same (this statement is apparently wrong). Human comes having the expectation to know the right conduct and behaviour and human goes by giving some examples of right or wrong conduct and behaviour to the world.

Feeling (BHAAVA) – Acceptance of someone’s or something’s existence. Thoughts (VICHAARA) – The expression of the feelings (Bhaava) is thoughts (Vichaara).

To make oneself free from the pressure of outside-world is absolute freedom; this is only the true (Absolute) freedom.

मुझे मेरी needs के अनुसार चीजें काम में लेनी है जिससे मैं खर्चा कम करूंगा और अनुकूलता व जरूरत के अनुसार ही करूंगा और साथ ही दुनिया के लोगों के लिए पर्याप्त साधन छोड़ने में भागीदार हो पाऊंगा |

मेरा खुश रहना मेरे भाव व विचार की व्यवस्था है | मेरा नाखुश रहना मेरे भाव व विचार कि अव्यवस्था है |

दुःख का कम होना सुख नहीं हैं|

समझना + जीना + समझाना

जब आप सामान से सम्मान और सुविधा से सुख पाने वाला फीता काट देते हैं तो आप अपनी जिंदगी के चीफ गेस्ट हो जाते हैं |

जब comparison से मुक्ति मिलती है तो ही दूसरों के लिए “प्यार” आता है, किसी के लिए उपयोगी होना, किसी के लिए सहयोगी होना ही उसको प्यार करना है |

Religious Person, धार्मिक व्यक्ति -समाधान, समृद्धि, अभयता व प्रकृति के साथ सामंजस्य को समझकर जीने वाला व्यक्ति ही धार्मिक-व्यक्ति है |

आवेश या अतिरेक - जो हम हैं उससे ज्यादा दिखाने की कोशिश करना आवेश/ अतिरेक है |

धरती के सभी शरीर जीवन को समझने के लिए साधन है |

आप संतुष्ट हैं इसके expression में काम करते हैं, या आप संतुष्ट हो जाए इसके लिए कोई काम करते हैं |

निर्णय लेने की अक्षमता = आलस/व्यस्तता

निरर्थकता के साथ जीते हुए निरर्थकता का पता ना होना- chill करना

मानसिक बेरोजगारी- मनोरंजन

उत्सव- सार्थकता में जीते हुए सार्थकता का पता होना |

जिसकी boundary/सीमा को पहचाना जा सकता है वह एक है |

सभी मानवो में पारदर्शिता, विश्वास, अखंड होने की अपेक्षा का कारण यही है कि खाली स्थान भी ऐसा ही है |

जब मैं खुद को सिर्फ शरीर रूप में पहचानता हूं तो वह जीव चेतना है | जब मैं खुद को शरीर व जीवन के रूप में पहचानता हूं तो वह मानव चेतना (ज्ञान अवस्था) है |

सह अस्तित्व का प्रतिरूप मानव है | खाली स्थान / व्यापक / ईश्वर का प्रतिरूप ज्ञान अथवा चैतन्य है |

Enlightened human is always stable from his mind and heart,

Ignorant human’s mind and heart is always wandered

Life (Jeevan) has infinite might, it has immense power and ability to think and understand; it cannot get satisfied and witness tranquillity from some petty facilities and fulfilled bodily needs.

Whenever I do something against the law of existence / or negative / or wrong then I am not against anyone, I am against the whole existence (when I am living correct as per existence then no matter somebody is with me or not because at that time the whole existence is with me).

Jeevan Vidhya is the research work of life.

In our families, due to the autocratic nature of everyone, communication is getting lessened and due to this we are not able to have communication/ dialogue on those things which we know are very important & we really want to have dialogue / conversation on them from our heart.

Not getting affected by someone’s inabilities and negativity is my biggest ability.

Something whose boundaries can be recognised is one.

Understanding = To understand + To live + To explain

जागृत मानव का मन स्थिर होता है, भ्रमित मानव का मन चंचल होता है |

किसी की अयोग्यता व नकारात्मकता से प्रभावित ना होना मेरी सबसे बड़ी योग्यता हैं |

हमारे परिवारों में सबकी मनमानी के चक्कर में संवादहीनता बढती जा रही हैं और इससे हम वो बातें कर ही नहीं कर पा रहे जो हम मन से करना चाहते हैं व कही ना कही हम जानते हैं की यह संवाद/ बातचीत बहुत जरूरी हैं |

जीवन-विद्या लाइफ का research-work है |

मन एक असीम ताकत है, उसमें असीम सोचने-समझने की शक्ति है, वह शरीर की मामूली सुविधाओं व जरूरतों (luxury) को पूरा करने से तृप्त नहीं हो सकता |

जब भी मैं कुछ (अस्तित्व सहज) negative/ गलत/ नियम के विरुद्ध करता हूं तो मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं मैं व्यापक/ प्रकृति के खिलाफ हूं और जब मैं (अस्तित्व सहज) पॉजिटिव होता हूँ, अस्तित्व के नियम के अनुसार चल रहा होता हूँ तो मेरे साथ कोई हो ना हो मेरे साथ पूरी प्रकृति होती है |

The replica of co-existence is human and the replica of blank space/ God is conscious-order/knowledge-order.

The reason behind having the expectation to be transparent, to have belief, to be undivided is this that GOD / the blank space is also like this.

When I identify myself just as a body then I live in animal consciousness. When I identify myself as the combination of body and life (Jeevan) then I live in human consciousness/ knowledge-order.

 All the bodies on the earth mean to understand the meaning of life (Jeevan).

You are satisfied and your work is the expression of your satisfaction or you work by expecting that you will get satisfaction?

Festival means knowing the worthiness of the worthy.

Entertainment means mental unemployment.

Chilling means not knowing the worthlessness of the worthless.

Inability to take the decision is laziness or overbusyness.

Religious Person – A resolved human being, having prosperity, having fearlessness, and helping the nature / existence in being balanced.

Fury or Aggression - Showing more than what we actually are is fury or aggression.

When you cut the ribbon which you’ve tied of a mentality which says to gain respect from materialism and happiness from facilities then you become the chief guest of your own life.

When the comparison gets removed completely then true love pours out automatically; being utilisable for someone, helping someone knowing his/her utilisation means you love him/her.